वन्दे मातरम् 🇮🇳
अर्थ: "मैं तुझे नमन करता हूँ, माँ"
ये सिर्फ एक नारा नहीं, भारत माँ के प्रति श्रद्धा और प्रेम है।
इसके बारे में 3 बातें:
1. रचना: बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1870s में उपन्यास _आनंदमठ_ में लिखा। 1882 में पहली बार छपा।
2. राष्ट्रीय गीत: 24 जनवरी 1950 को इसे भारत का राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया।
3. भाव: यहाँ "माँ" का मतलब है भारत भूमि — इसकी नदियाँ, खेत, संस्कृति, लोग।
पहली 2 पंक्तियाँ:
वन्दे मातरम्!
सुजलां सुफलां मलयज शीतलाम्,
शस्य श्यामलां मातरम्।
मतलब: "मैं तुम्हें नमन करता हूँ माँ, जो जल से समृद्ध, फलों से भरी, शीतल हवाओं वाली, फसलों से हरी-भरी है।"
स्वतंत्रता संग्राम में ये नारा लोगों में जोश भर देता था। आज भी परेड, स्कूल, और देशभक्ति के मौकों पर गूंजता है।
ठीक है, वन्दे मातरम् के इतिहास की 3 मुख्य बातें:
1. रचना और पृष्ठभूमि - 1870s
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने इसे अपने बांग्ला उपन्यास *आनंदमठ 1882* में लिखा।
कहानी संन्यासी विद्रोहियों की थी जो अकाल और अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ लड़े। गीत में "भारत माँ" को देवी दुर्गा के रूप में दर्शाया गया।
2. स्वतंत्रता आंदोलन का प्राण - 1896 से 1947
- 1896: पहली बार कांग्रेस अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे गाया
- स्वदेशी आंदोलन 1905: बंगाल विभाजन के विरोध में ये नारा गली-गली गूंजा। जेल जाने वाले क्रांतिकारी भी यही बोलते थे
- अंग्रेजों ने बैन किया: क्योंकि इसमें "देशभक्ति की आग" थी। फिर भी लोग चोरी-छिपे गाते थे
3. राष्ट्रीय गीत का दर्जा - 1950
आज़ादी के बाद 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने इसे भारत का राष्ट्रीय गीत घोषित किया।
राष्ट्रगान "जन गण मन" है और राष्ट्रीय गीत "वन्दे मातरम्" है। दोनों का समान सम्मान है।
वन्दे मातरम् - पूरा गीत + अर्थ 🇮🇳
मूल संस्कृत-बांग्ला में
वन्दे मातरम्!
सुजलां सुफलां मलयज शीतलाम्
शस्य श्यामलां मातरम्
वन्दे मातरम्!
शुभ्रज्योत्स्ना पुलकित यामिनीम्
फुल्लकुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्
सुखदां वरदां मातरम्
वन्दे मातरम्!
कोटि-कोटि कण्ठ कलकल निनाद कराले
कोटि-कोटि भुजैर्धृत खरकरवाले
अबला केन मा एत बले
बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं
रिपुदल वारिणीं मातरम्
वन्दे मातरम्!
तुमि विद्या तुमि धर्म
तुमि हृदि तुमि मर्म
त्वं हि प्राणा: शरीरे
बाहुते तुमि मा शक्ति
हृदये तुमि मा भक्ति
तोमारई प्रतिमा गडि मन्दिरे-मन्दिरे
वन्दे मातरम्!
त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी
कमला कमलदल विहारिणी
वाणी विद्यादायिनी
नमामि त्वां
नमामि कमलां
अमलां अतुलां
सुजलां सुफलां मातरम्
वन्दे मातरम्!
श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम्
धरणीं भरणीं मातरम्
वन्दे मातरम्!
हिंदी में अर्थ
1. मैं तुम्हें नमन करता हूँ माँ!
तुम जल से समृद्ध हो, फलों से भरी हो, सुगंधित हवा से शीतल हो।
हरी-भरी फसलों वाली हो माँ। मैं तुम्हें नमन करता हूँ।
2. तुम्हारी रातें चाँद की उज्ज्वल रोशनी से जगमगाती हैं।
पेड़-पौधे फूलों से शोभित हैं। तुम मीठा बोलने वाली, सुख देने वाली, वरदान देने वाली माँ हो।
3. करोड़ों कंठों की गर्जना और करोड़ों भुजाओं में तलवारें लिए
तुम कमजोर कैसे हो सकती हो? तुम बहुत बलशालिनी हो।
दुश्मनों का नाश करने वाली माँ को मैं नमन करता हूँ।
4. तुम ही विद्या हो, तुम ही धर्म हो।
तुम दिल में हो, तुम ही जीवन का सार हो। तुम ही शरीर में प्राण हो।
भुजाओं में शक्ति और हृदय में भक्ति तुम ही हो। तुम्हारी ही मूर्ति हम हर मंदिर में बनाते हैं।
5. तुम ही दुर्गा हो दस हाथों में शस्त्र धारण करने वाली।
तुम ही कमल पर विराजमान लक्ष्मी हो। तुम ही ज्ञान देने वाली सरस्वती हो।
मैं तुम्हें नमन करता हूँ - निर्मल, अनुपम, जल और फल से भरपूर माँ।
6. तुम श्यामल, सरल, मुस्कुराती हुई, आभूषणों से सजी धरती माँ हो।
तुम ही हमारा पालन करती हो। मैं तुम्हें नमन करता हूँ।
